गायत्री मंत्र
वैदिक परंपरा के सर्वाधिक प्रतिष्ठित मंत्रों में से एक (व्यापक प्रचलित मान्यता)
ॐ भूर्भुवः स्वः
तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात्॥
पढ़ने का समय
5 मिनट
शब्द
24
देवता
सूर्य
स्रोत
ऋग्वेद 3.62.10 — ऋषि विश्वामित्र, देवता सवितृ, छन्द गायत्री (मूल ग्रंथ)
गायत्री मंत्र क्या है?
गायत्री मंत्र सवितृ (सूर्य रूप दिव्य तेज) को समर्पित प्राचीन वैदिक मंत्र है — ऋग्वेद 3.62.10 (मूल ग्रंथ; ऋषि विश्वामित्र, देवता सवितृ)। गायत्री छंद में होने से इसका नाम गायत्री पड़ा; इसमें 24 अक्षर माने जाते हैं। परंपरा में इसे बुद्धि के प्रकाश की प्रार्थना माना जाता है।
सरल अर्थ:
"हे दिव्य प्रकाश (सूर्य), हम तुम्हें नमस्कार करते हैं। कृपया हमारी बुद्धि को प्रकाशित करो और हमें सही रास्ते पर चलने में मदद करो।"
वैदिकप्राचीन परंपरा
कैसे पढ़ें?
- सुबह जल्दी बैठ जाएं
- धीरे-धीरे एक बार सुनें
- धीरे-धीरे दोहराएँ (108 बार)
- शांत और शुद्ध मन से रखें