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श्रुति एवं स्मृति

ग्रंथ पुस्तकालय

40 ग्रंथ — वेद, उपनिषद, गीता, महाकाव्य, पुराण और दर्शन-सूत्र। जहाँ केवल परिचय है, वहाँ यही स्पष्ट लिखा है।

40 ग्रंथ

वेद

ऋग्वेद

ऋग्वेदः

संरचना: 10 मंडल, 1028 सूक्त, लगभग 10,552 मंत्र

सत्य, ऋत और यज्ञ की वैदिक दृष्टि; "एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति" — सत्य एक है, विद्वान उसे अनेक नामों से कहते हैं।

कैसे आरंभ करें: परिचय और चुने हुए सूक्तों (गायत्री, नासदीय, पुरुष सूक्त) के सरल अर्थ से आरंभ करें।

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वेद

यजुर्वेद

यजुर्वेदः

संरचना: शुक्ल एवं कृष्ण — दो शाखा-परंपराएँ; लगभग 1,975 मंत्र (शुक्ल पाठ)

कर्म (यज्ञ) की विधिपूर्वक साधना; इसी परंपरा से ईश और बृहदारण्यक जैसे उपनिषद जुड़े हैं।

कैसे आरंभ करें: परिचय से आरंभ करें; रुद्राध्याय और शांतिपाठ प्रसिद्ध अंश हैं।

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वेद

सामवेद

सामवेदः

संरचना: लगभग 1,875 मंत्र — अधिकांश ऋग्वेद से, गान हेतु स्वरबद्ध

मंत्रों का गान-रूप; भारतीय संगीत परंपरा की जड़ें इससे जोड़ी जाती हैं। गीता में "वेदानां सामवेदोऽस्मि" कहा गया है।

कैसे आरंभ करें: परिचय से आरंभ करें; साम-गान की श्रवण परंपरा को समझें।

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वेद

अथर्ववेद

अथर्ववेदः

संरचना: 20 कांड, लगभग 5,977 मंत्र

व्यावहारिक जीवन से जुड़ा वेद; पृथ्वी सूक्त में धरती के प्रति कृतज्ञता का सुंदर भाव है।

कैसे आरंभ करें: परिचय और पृथ्वी सूक्त के सरल अर्थ से आरंभ करें।

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उपनिषद

ईश उपनिषद्

ईशोपनिषद्

संरचना: 18 मंत्र (शुक्ल यजुर्वेद)

"ईशावास्यमिदं सर्वम्" — यह सब ईश्वर से व्याप्त है; त्यागपूर्वक भोग करो।

कैसे आरंभ करें: सबसे छोटे उपनिषदों में से — पहले दो मंत्रों के अर्थ से आरंभ करें।

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उपनिषद

केन उपनिषद्

केनोपनिषद्

संरचना: 4 खंड (सामवेद)

"किसकी प्रेरणा से मन जाता है?" — जानने वाले को जानने की जिज्ञासा।

कैसे आरंभ करें: प्रथम खंड के प्रश्नों से आरंभ करें।

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उपनिषद

कठ उपनिषद्

कठोपनिषद्

संरचना: 2 अध्याय, 6 वल्लियाँ (कृष्ण यजुर्वेद)

मृत्यु के देवता यम से आत्मज्ञान का संवाद; "उत्तिष्ठत जाग्रत" का उद्घोष।

कैसे आरंभ करें: नचिकेता की कथा से आरंभ करें — यह सबसे सुगम प्रवेश है।

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उपनिषद

मुंडक उपनिषद्

मुण्डकोपनिषद्

संरचना: 3 मुंडक, 6 खंड (अथर्ववेद)

"सत्यमेव जयते" इसी उपनिषद् से है; परा (आध्यात्मिक) और अपरा (लौकिक) विद्या का भेद।

कैसे आरंभ करें: परा-अपरा विद्या के प्रसंग से आरंभ करें।

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उपनिषद

मांडूक्य उपनिषद्

माण्डूक्योपनिषद्

संरचना: 12 मंत्र (अथर्ववेद) — सबसे संक्षिप्त

ॐ के अ-उ-म और चेतना की चार अवस्थाओं का दर्शन; गौड़पाद कारिका इसी पर आधारित है।

कैसे आरंभ करें: ॐ के अर्थ से आरंभ करें; छोटा पर गहन — धीरे पढ़ें।

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उपनिषद

तैत्तिरीय उपनिषद्

तैत्तिरीयोपनिषद्

संरचना: 3 वल्लियाँ (कृष्ण यजुर्वेद)

"सत्यं वद, धर्मं चर, मातृदेवो भव, पितृदेवो भव, आचार्यदेवो भव" — दीक्षांत उपदेश इसी से है।

कैसे आरंभ करें: शिक्षा-वल्ली के दीक्षांत उपदेश से आरंभ करें।

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उपनिषद

ऐतरेय उपनिषद्

ऐतरेयोपनिषद्

संरचना: 3 अध्याय (ऋग्वेद)

महावाक्य "प्रज्ञानं ब्रह्म" — चेतना ही ब्रह्म है।

कैसे आरंभ करें: सृष्टि-वर्णन से आरंभ करें।

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उपनिषद

छान्दोग्य उपनिषद्

छान्दोग्योपनिषद्

संरचना: 8 अध्याय (सामवेद) — सबसे बड़े उपनिषदों में

महावाक्य "तत् त्वम् असि" — वह तू ही है; सत् से सृष्टि का प्रसिद्ध संवाद।

कैसे आरंभ करें: छठे अध्याय (उद्दालक-श्वेतकेतु) से आरंभ करें।

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उपनिषद

प्रश्न उपनिषद्

प्रश्नोपनिषद्

संरचना: 6 प्रश्न (अथर्ववेद)

प्राण कहाँ से आता है, कौन सोता है, ॐ का ध्यान क्या देता है — प्रश्नोत्तर शैली का उपनिषद्।

कैसे आरंभ करें: पहले प्रश्न से क्रमशः पढ़ें।

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उपनिषद

बृहदारण्यक उपनिषद्

बृहदारण्यकोपनिषद्

संरचना: 6 अध्याय (शुक्ल यजुर्वेद) — सबसे बृहद् उपनिषदों में

महावाक्य "अहं ब्रह्मास्मि"; "असतो मा सद्गमय" पावमान मंत्र इसी में (1.3.28) है।

कैसे आरंभ करें: याज्ञवल्क्य-मैत्रेयी संवाद से आरंभ करें।

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उपनिषद

श्वेताश्वतर उपनिषद्

श्वेताश्वतरोपनिषद्

संरचना: 6 अध्याय (कृष्ण यजुर्वेद)

ईश्वर (रुद्र) के प्रति भक्ति और ध्यान-योग का समन्वय; शैव दर्शन में विशेष आदर।

कैसे आरंभ करें: ध्यान-विधि के अध्याय 2 से आरंभ करें।

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गीता

श्रीमद्भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता

संरचना: 18 अध्याय, 700 श्लोक (प्रचलित पाठ) — महाभारत के भीष्म पर्व का अंश

कर्मण्येवाधिकारस्ते — फल की चिंता छोड़ कर्तव्य; समत्व ही योग है।

कैसे आरंभ करें: अध्याय 2 (सांख्य योग) के सरल अर्थ से आरंभ करना प्रचलित है।

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महाकाव्य

वाल्मीकि रामायण

रामायणम्

संरचना: 7 कांड, लगभग 24,000 श्लोक (परंपरा अनुसार)

मर्यादा, वचन-पालन और धर्म-निष्ठा का आदर्श; आदिकाव्य माना जाता है।

कैसे आरंभ करें: कांड-परिचय से आरंभ करें; सुंदरकांड पाठ की व्यापक परंपरा है।

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महाकाव्य

महाभारत

महाभारतम्

संरचना: 18 पर्व, लगभग 1,00,000 श्लोक (परंपरा अनुसार) — वेदव्यास रचित

"धर्म की जय, अधर्म का क्षय" — धर्म-अधर्म के सूक्ष्म प्रश्नों का महाकाव्य।

कैसे आरंभ करें: पर्व-परिचय से आरंभ करें; गीता और विदुर नीति सुगम प्रवेश हैं।

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महाकाव्य

श्रीरामचरितमानस

श्रीरामचरितमानसम्

संरचना: 7 कांड — अवधी भाषा, गोस्वामी तुलसीदास रचित (16वीं शताब्दी)

भक्ति और मर्यादा का समन्वय; उत्तर भारत की सबसे लोकप्रिय राम-कथा।

कैसे आरंभ करें: बालकांड के आरंभिक दोहों या सुंदरकांड से आरंभ करना प्रचलित है।

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दर्शन-सूत्र

ब्रह्मसूत्र

ब्रह्मसूत्राणि

संरचना: 4 अध्याय, 555 सूत्र (प्रचलित पाठ) — बादरायण रचित

"अथातो ब्रह्मजिज्ञासा" — ब्रह्म की जिज्ञासा से आरंभ; शंकर, रामानुज, मध्व आदि आचार्यों के भाष्य प्रसिद्ध हैं।

कैसे आरंभ करें: सूत्र-शैली कठिन है — पहले परिचय और चतुःसूत्री का अर्थ पढ़ें।

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दर्शन-सूत्र

पतंजलि योगसूत्र

योगसूत्राणि

संरचना: 4 पाद, 196 सूत्र (प्रचलित पाठ)

"योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः" — योग चित्त की वृत्तियों का निरोध है।

कैसे आरंभ करें: समाधिपाद के पहले चार सूत्रों से आरंभ करें।

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पुराण

श्रीमद्भागवत पुराण

श्रीमद्भागवतम्

संरचना: 12 स्कंध, लगभग 18,000 श्लोक (परंपरा अनुसार)

भक्ति की सर्वोच्च प्रतिष्ठा; वैष्णव परंपरा का प्रधान पुराण।

कैसे आरंभ करें: प्रह्लाद या ध्रुव चरित से आरंभ करें; दशम स्कंध सर्वाधिक प्रसिद्ध है।

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पुराण

विष्णु पुराण

विष्णुपुराणम्

संरचना: 6 अंश, लगभग 7,000 श्लोक (उपलब्ध पाठ; परंपरागत संख्या 23,000)

पुराणों के पंचलक्षण (सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, मन्वंतर, वंशानुचरित) का सुव्यवस्थित उदाहरण।

कैसे आरंभ करें: प्रथम अंश की सृष्टि-कथा से आरंभ करें।

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पुराण

शिव पुराण

शिवपुराणम्

संरचना: 7 संहिताएँ (प्रचलित पाठ), लगभग 24,000 श्लोक (परंपरा अनुसार)

शैव परंपरा का प्रमुख पुराण; 12 ज्योतिर्लिंगों की कथाएँ इसी से प्रचलित हैं।

कैसे आरंभ करें: ज्योतिर्लिंग कथाओं से आरंभ करें।

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पुराण

ब्रह्म पुराण

ब्रह्मपुराणम्

संरचना: लगभग 10,000 श्लोक (परंपरा अनुसार) — सूची में प्रथम, "आदि पुराण"

तीर्थों और सूर्य-उपासना की परंपराओं का विस्तृत वर्णन।

कैसे आरंभ करें: परिचय से आरंभ करें।

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पुराण

मार्कण्डेय पुराण

मार्कण्डेयपुराणम्

संरचना: लगभग 9,000 श्लोक (परंपरा अनुसार); अध्याय 81-93 देवी महात्म्य

देवी महात्म्य (दुर्गा सप्तशती) इसी पुराण का अंश है — शाक्त परंपरा का केंद्रीय पाठ।

कैसे आरंभ करें: देवी महात्म्य के परिचय से आरंभ करें।

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पुराण

देवी महात्म्य (दुर्गा सप्तशती)

देवीमाहात्म्यम्

संरचना: 13 अध्याय, 700 श्लोक (सप्तशती) — मार्कण्डेय पुराण का अंश

शक्ति की सर्वोच्चता का प्रतिपादन; नवरात्रि पाठ की केंद्रीय परंपरा (शाक्त परंपरा)।

कैसे आरंभ करें: तीन चरितों के परिचय से आरंभ करें।

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पुराण

पद्म पुराण

पद्मपुराणम्

संरचना: 5-6 खंड (पाठभेद), लगभग 55,000 श्लोक (परंपरा अनुसार)

तीर्थों, व्रतों और भक्ति के महात्म्यों का बृहद् संग्रह (वैष्णव झुकाव)।

कैसे आरंभ करें: परिचय से आरंभ करें।

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पुराण

नारद पुराण

नारदपुराणम्

संरचना: 2 भाग, लगभग 25,000 श्लोक (परंपरा अनुसार)

नारद-परंपरा की भक्ति-दृष्टि; 18 पुराणों की अनुक्रमणिका के लिए भी जाना जाता है।

कैसे आरंभ करें: परिचय से आरंभ करें।

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पुराण

गरुड़ पुराण

गरुडपुराणम्

संरचना: 2 खंड (आचार/प्रेत कल्प), लगभग 19,000 श्लोक (परंपरा अनुसार)

अंत्येष्टि-परंपरा से जुड़ा पाठ; मृत्यु-चिंतन के माध्यम से धर्म-प्रेरणा (परंपरागत विवरण)।

कैसे आरंभ करें: परिचय से आरंभ करें; प्रेत कल्प का पाठ परंपरागत रूप से विशेष अवसरों पर होता है।

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पुराण

वराह पुराण

वराहपुराणम्

संरचना: लगभग 24,000 श्लोक (परंपरा अनुसार)

विष्णु के वराह अवतार द्वारा पृथ्वी-उद्धार की कथा केंद्र में है।

कैसे आरंभ करें: परिचय से आरंभ करें।

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पुराण

वामन पुराण

वामनपुराणम्

संरचना: लगभग 10,000 श्लोक (परंपरा अनुसार)

वामन-बलि कथा — विनम्रता और दान की परंपरागत शिक्षा।

कैसे आरंभ करें: परिचय से आरंभ करें।

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पुराण

कूर्म पुराण

कूर्मपुराणम्

संरचना: लगभग 17,000 श्लोक (परंपरागत संख्या); उपलब्ध पाठ छोटा

समुद्र-मंथन प्रसंग और शिव-विष्णु समन्वय की दृष्टि।

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पुराण

मत्स्य पुराण

मत्स्यपुराणम्

संरचना: लगभग 14,000 श्लोक (परंपरा अनुसार)

प्रलय-कथा के साथ मंदिर-वास्तु और मूर्तिकला के प्राचीन विवरण।

कैसे आरंभ करें: मत्स्य-मनु कथा से आरंभ करें।

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पुराण

लिंग पुराण

लिङ्गपुराणम्

संरचना: 2 भाग, लगभग 11,000 श्लोक (परंपरा अनुसार)

लिंग को निराकार शिव का प्रतीक बताने वाला शैव पुराण।

कैसे आरंभ करें: परिचय से आरंभ करें।

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पुराण

स्कंद पुराण

स्कन्दपुराणम्

संरचना: सबसे बृहद् पुराण — लगभग 81,000 श्लोक (परंपरा अनुसार), 7 खंड

तीर्थ-महात्म्यों का विशालतम संग्रह; काशी खंड विशेष प्रसिद्ध है।

कैसे आरंभ करें: काशी खंड के परिचय से आरंभ करें।

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पुराण

अग्नि पुराण

अग्निपुराणम्

संरचना: लगभग 15,000 श्लोक (परंपरा अनुसार)

पुराणों में "विश्वकोश" — अनेक विद्याओं का सार-संग्रह।

कैसे आरंभ करें: परिचय से आरंभ करें।

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पुराण

भविष्य पुराण

भविष्यपुराणम्

संरचना: 4 पर्व (उपलब्ध पाठ); पाठ-परंपरा में पर्याप्त भेद

सूर्य-उपासना और व्रतों का वर्णन; उपलब्ध पाठ में परवर्ती जोड़ माने जाते हैं (ऐतिहासिक विवरण)।

कैसे आरंभ करें: परिचय से आरंभ करें।

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पुराण

ब्रह्मवैवर्त पुराण

ब्रह्मवैवर्तपुराणम्

संरचना: 4 खंड, लगभग 18,000 श्लोक (परंपरा अनुसार)

राधा-कृष्ण भक्ति की प्रधानता; गणेश-कथाओं का भी स्रोत।

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पुराण

ब्रह्मांड पुराण

ब्रह्माण्डपुराणम्

संरचना: लगभग 12,000 श्लोक (परंपरा अनुसार)

ब्रह्मांड की रचना का वर्णन; ललिता सहस्रनाम इसी से संबद्ध माना जाता है (शाक्त परंपरा)।

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